Book name – The Hsin Hsin Ming
Author – Seng-tsan ( zen master )
The Hsin Hsin Ming book with Hindi translation
The Great Way is not difficult For those not attached to preferences.
When neither love nor hate arises,
all is clear and undisguised.
Separate by the smallest amount, however, and you are as far from it as heaven is from earth.
महान रास्ता उनके लिए मुश्किल नहीं है,
जिन्के कोई चुनाव नहीं है |
जब मन में कोई पसंद और नापसंद नहीं होती, तो चित्त साफ और बेपर्दा हो जाता है।
हालाँकि, थोड़ा सा भी अंतर करते हो तो आप इससे उतने ही दूर हैं जितना कि स्वर्ग पृथ्वी से है।
if you wish to know the truth,
then hold to no opinions for or against anything.
To set up what you like against what you dislike is the disease of the mind.
यदि आप सत्य को जानना चाहते हैं, तो किसी भी बात के पक्ष या विपक्ष में कोई राय न रखें।
पसंद-नापसंद मन की बीमारी है।
When the fundamental nature of things is not recognized the mind’s essential peace is disturbed to no avail.
The Way is perfect, as vast space is perfect, where nothing is lacking and nothing is in excess.
जब (मार्ग का) गहरा अर्थ नहीं समझा जाता है, तो मन की आंतरिक शांति भंग हो जाती है।
रास्ता एकदम सही है, क्योंकि विशाल स्थान परिपूर्ण है, जहां किसी चीज की कमी नहीं है और किसी चीज की अधिकता नहीं है।
The Hsin Hsin Ming Hindi
indeed, it is due to our grasping and rejecting that we do not know the true nature of things.
Live neither in the entanglements of outer things, nor in ideas or feelings of emptiness.
Be serene and at one with things and erroneous views will disappear by themselves.

वास्तव में, यह हमारे पकड़ने और अस्वीकार करने के कारण है कि हम चीजों की वास्तविक प्रकृति को नहीं जानते हैं।
न तो बाहरी वस्तुओं की उलझनों में जियो, न ही विचारों या खालीपन की भावनाओं में।
शांत रहें और चीजों के साथ एक हों और गलत विचार अपने आप विलीन हो जाएंगे।
When you try to stop activity to achieve quietude, your very effort fills you with activity.
As long as you remain attached to one extreme or another you will never know Oneness.
Those who do not live in the Single Way cannot be free in either activity or quietude, in assertion or denial.
जब आप शांति को प्राप्त करने के लिए क्रिया को रोकने की कोशिश करते हैं, तो प्रयास ही आपको क्रियाओ से भर देता है।
जब तक आप एक अति से या दूसरे से जुड़े रहते हैं तब तक आप एक मार्ग को कभी नहीं जान पाएंगे।
जो लोग एक मार्ग में नहीं रहते हे वे न तो क्रियाओ से मुक्त हो सकते हे ना ही शांति से ।
Deny the reality of things and you miss their reality; Assert the emptiness of things and you miss their reality.
The more you talk and think about it, the further you wander from the truth.
So cease attachment to talking and thinking, and there is nothing you will not be able to know.
वस्तुओं की सच्चाई को नकारना उनकी सच्चाई को गवा देना है, वस्तुओं के खालीपन के बारे में कहना उनकी सच्चाई को गवा देना है।
जितना अधिक आप इसके बारे में बात करते हैं और सोचते हैं, उतने ही तुम सत्य से दूर चले जाते हो।
इसलिए बात करने और सोचने का मोह छोड़ दो, और ऐसा कुछ भी नहीं है जिसे तुम नहीं जान पाओगे।
To return to the root is to find the essence, but to pursue appearances or “enlightenment” is to miss the Source.
To awaken even for a moment is to go beyond appearance and emptiness.
जड़ की ओर लौटना सार को खोजना है, लेकिन जो दिख रहा हे उसके पीछे भागना स्रोत को चूकना है।
जिस क्षण तुम प्रबुद्ध होते हो, तुम दिखावे और शून्यता से परे चले जाते हो।
Changes that seem to occur in the empty world we make real only because of our ignorance. Do not seek for the truth; only cease to cherish opinions.
दुनिया में होने वाले परिवर्तन अज्ञानता के कारण ही वास्तविक प्रतीत होते हैं। सत्य की खोज मत करो; केवल विचारों को संजोना बंद करें।
Do not remain in a dualistic state; avoid such easy habits carefully.
if you attach even to a trace of this and that, of right and wrong, the Mind-essence will be lost in confusion.
Although all dualities arise from the One, do not be attached even to ideas of this One.
द्वैतवादी विचारों को धारण न करें, ऐसी आदतों से सावधानी पूर्वक बचें।
सही-गलत का जरा भी अंश रह जाए तो मन भ्रम में खो जाता है।
यद्यपि सभी द्वैत एक से उत्पन्न होते हैं, फिर भी इस एक से भी मत चिपके रहो।
When the mind exists undisturbed in the Way, there is no objection to anything in the world; and when there is no objection to anything, things cease to be-in the old way.
When no discriminating attachment arises, the old mind ceases to exist.
Let go of things as separate existences and mind too vanishes.
Likewise when the thinking subject vanishes so too do the objects created by mind.
The Hsin Hsin Ming Hindi
जब मन मार्ग में अविचलित रहता है, दुनिया में किसी भी चीज़ से कोई आपत्ति नहीं है; और जब किसी बात पर आपत्ति न हो, चीजें पुराने तरीके से समाप्त हो जाती हैं।
जब कोई भेदभावपूर्ण लगाव पैदा नहीं होता है, पुराने मन का अस्तित्व समाप्त हो जाता है|
जब विचारने वाली वस्तुये विलीन होने लगती हे तब विचारने वाला मन भी विलीन होने लगता हे जैसे की जब मन विलीन होता हे तो वस्तुये विलीन हो जाती हे।

The arising of other gives rise to self; giving rise to self generates other.
Know these seeming two as facets of the One Fundamental Reality.
in this Emptiness, these two are really one- and each contains all phenomena.
if not comparing, nor attached to “refined” and “vulgar”- you will not fall into judgment and opinion.
The Great Way is embracing and spacious- to live in it is neither easy nor difficult.
दूसरे का उत्पन्न होना स्वयं को जन्म देता है; स्वयं को जन्म देकर दूसरे को उत्पन्न करता है।
इन दो प्रतीत होने वाले पहलुओं को एक मौलिक वास्तविकता के रूप में जानें
इस शून्यता में, ये दोनों सच में एक हैं और प्रत्येक में सभी घटनाएं शामिल हैं।
यदि न तो तुलना की जा रही है, और न ही लगाव है “शिष्ट” और “अशिष्ट” के प्रति तो आप निर्णय और राय में नहीं उलझेंगे ।
महान मार्ग सर्वव्यापी है और विशाल है इसमें रहना न तो आसान है और न ही मुश्किल।
Those who rely on limited views are fearful and irresolute: the faster they hurry, the slower they go.
To have a narrow mind, and to be attached to getting enlightenment is to lose one’s center and go astray.
When one is free from attachment, all things are as they are, and there is neither coming nor going.
जो लोग सीमित विचारों पर भरोसा करते हैं वे डरपोक और संकल्पहीन होते हैं, वे जितनी जल्दी करते हैं, उतनी ही धीमी गति से चलते हैं।
संकीर्ण मन के लिए, आत्मज्ञान से लगाव भी अपना केंद्र खोना और भटक जाना है।
जब कोई आसक्ति से मुक्त होता है, तो सभी चीजें वैसी ही हैं जैसी वे हैं, और न आ रहा है न जा रहा है।
When in harmony with the nature of things, your own fundamental nature, you will walk freely and undisturbed.
However, when mind is in bondage, the truth is hidden, and everything is murky and unclear, and the burdensome practice of judging brings annoyance and weariness.
What benefit can be derived from attachment to distinctions and separations?
जब चीजों की प्रकृति और आपकी अपनी मौलिक प्रकृति, एकरूप होगी तो आप स्वतंत्र रूप से और बिना किसी बाधा के चलेंगे।
हालाँकि, जब मन बंधन में होता है, तो सच्चाई छिप जाती हे और सब कुछ धुंधला और अस्पष्ट होता है, और जानने का अभ्यास चिढ और थकान लाता है।
भेद और विभाजन से लगाव के क्या लाभ मिल सकते है ?
if you wish to move in the One Way do not dislike the worlds of senses and ideas.
indeed, to embrace them fully is identical with true Enlightenment.
The wise person attaches to no goals but the foolish person fetters himself or herself.
There is one Dharma, without differentiation. Distinctions arise from the clinging needs of the ignorant.
To seek Mind with the discriminating mind is the greatest of mistakes.
अगर आप एक मार्ग पर आगे बढ़ना चाहते हैं तो इंद्रियों और विचारों की दुनिया को नापसंद मत करो।
वास्तव में, उन्हें पूरी तरह से स्वीकार करना मार्ग के साथ होना हे ।
बुद्धिमान व्यक्ति किसी भी लक्ष्य से जुड़ता नहीं है परन्तु मूर्ख व्यक्ति खुद को बेड़ियों में बांध लेता हे |
एक ही धर्म है, बिना किसी भेदभाव के। भेद उत्पन्न होते हैं पकड़ी हुई जरूरतों के अज्ञान के कारण।
भेदभाव (मूल्यांकन) करनेवाले दिमाग से सच्चे मन की खोज करना सबसे बड़ी गलती है।
Rest and unrest derive from illusion; with enlightenment, attachment to liking and disliking ceases.
All dualities come from ignorant inference.
They are like dreams, phantoms, hallucinations- it is foolish to try to grasp them.
Gain and loss, right and wrong: finally abandon all such thoughts at once.
स्थिरता और बेचैनी भ्रम से उत्पन्न होती है; ज्ञान के साथ, पसंद और नापसंद के प्रति लगाव समाप्त हो जाता है।
सभी द्वैत अज्ञान से उत्पन्न होते हैं।
वे सपने, आभास , मतिभ्रम की तरह हैं- उन्हें पकड़ने की कोशिश करना मूर्खता है।
लाभ और हानि, सही और गलत: अंत में ऐसे सभी विचारों को एक बार में छोड़ दें।
The Hsin Hsin Ming Hindi
if the eye never sleeps, all dreams will naturally cease.
if the mind makes no discriminations, the ten thousand things are as they are, of single essence.
To realize the mystery of this One-essence is to be released from all entanglements.
When all things are seen without differentiation, the One Self-essence is everywhere revealed.
No comparisons or analogies are possible in this causeless, relationless state of just this One.
अगर आँख कभी नहीं सोती, सभी सपने स्वाभाविक रूप से समाप्त हो जाएंगे।
अगर मन कोई भेदभाव नहीं करता, दस हजार चीजे जैसी वो हे वैसी हो जाती हे एक स्वाभाव की ।
इस एक-सार के रहस्य को समझने के लिए सभी बंधनों से मुक्त होना है।
जब सब कुछ बिना भेदभाव के देखा जाता है, एक स्व-सार(ONENESS) हर जगह प्रकट होता है।
इस एक की अकारण, संबंधहीन स्थिति में कोई तुलना या समानता संभव नहीं है।
When movement stops, there is no movement- and when no movement, there is no stopping.
When such dualities cease to exist Oneness itself cannot exist.
To this ultimate state no law or description applies.
जब गति रुक जाती है तो कोई गति नहीं होती- और जब कोई गति नहीं है, तो कोई रोक नहीं होती है।
जब इस तरह के द्वैत का अस्तित्व समाप्त हो जाता है तो एकत्व स्वयं मौजूद नहीं हो सकता।
इस परम अवस्था को कोई नियम या वर्णन लागू नहीं होता है।
For the Realized mind at one with the Way all self-centered striving ceases.
Doubts and irresolutions vanish and the Truth is confirmed in you.
With a single stroke you are freed from bondage; nothing clings to you and you hold to nothing.
मार्ग के साथ एक हुए साकार मन के लिए सभी आत्मकेंद्रित प्रयास बंद हो जाते हैं।
संशय और दुविधाये दूर हो जाते हैं और तुममें सत्य की पुष्टि हो जाती है।
एक ही झटके से तुम बंधन से मुक्त हो जाते हो; कुछ भी तुमसे चिपकता नहीं है और तुम कुछ भी नहीं पकड़ते।
All is empty, clear, self-illuminating, with no need to exert the mind.
Here, thinking, feeling, understanding, and imagination are of no value.
in this world “as it really is” there is neither self nor other-than-self.
सब शुन्य, स्पष्ट, आत्म-प्रकाशमान है, दिमाग लगाने की जरूरत नहीं है।
इस अवस्थामे विचार, भावना, समझ और कल्पना का कोई मूल्य नहीं हैं।
यथाभूत इस दुनिया में न तो स्वयं है और न ही स्वयं के अलावा अन्य।
To know this Reality directly is possible only through practicing non-duality.
When you live this non-separation, all things manifest the One, and nothing is excluded.
Whoever comes to enlightenment, no matter when or where, Realizes personally this fundamental Source.
इस हकीकत को सीधे जानने के लिए अद्वैत के अभ्यास से ही संभव है।
जब आप इस तरह से जीते हैं, आप पाते हे की सभी चीजें एक को ही प्रकट करती हैं, और कुछ भी इससे बाहर नहीं है।
जो कोई भी आत्मज्ञान का अनुभव करता है, चाहे वह कब किया हो या कहां पर किया हो उससे कोई फर्क नहीं पड़ता है, वह इस मौलिक स्रोत को व्यक्तिगत रूप से महसूस करता है।
This Dharma-truth has nothing to do with big or small, with time and space.
Here a single thought is as ten thousand years. Not here, not there-
but everywhere always right before your eyes.
infinitely large and infinitely small: no difference, For definitions are irrelevant and no boundaries can be discerned.
So likewise with “existence” and “non-existence.”
इस धर्म-सत्य को बड़ा या छोटा , समय और स्थान के साथ कोई लेना-देना नहीं है ।
यहां एक विचार दस हजार वर्ष के बराबर है। यहां नहीं, वहां नहीं लेकिन हर जगह हमेशा आपकी आंखों के सामने।
असीम विशाल और असीम शुक्ष्म, कोई अंतर नहीं, क्योंकि परिभाषाऐ मिट चुकी हे और कोई हद नहीं देखी जा सकती|
ऐसा ही जिव और निर्जीव के साथ भी हे।
Don’t waste your time in arguments and discussion attempting to grasp the ungraspable.
वाद-विवाद और चर्चा में अपना समय बर्बाद न करें जो समझ से बहार हे उसे समज़ने का प्रयास करे ।
The Hsin Hsin Ming Hindi
Each thing reveals the One, the One manifests as all things.
To live in this Realization is not to worry about perfection or non-perfection.
To put your trust in the Heart-Mind is to live without separation, and in this non-duality you are one with your Life Source.
Words! Words!
The Way is beyond language,
For in it there is no yesterday
no tomorrow
no today.
हर चीज़ एक को प्रकट करती है, एक ही सभी चीजों के रूप में प्रकट होता है।
इस एहसास में रहने के लिए पूर्णता या गैर-पूर्णता के बारे में चिंता करने की ज़रूरत नहीं है।
दिल-दिमाग पर अपना भरोसा रखने के लिए पृथकरण के बिना जीना है, और इस अद्वैत में आप अपने जीवनस्रोत के साथ एक हैं।
शब्दों! शब्दों!
रास्ता भाषा से परे है,
क्योंकि इसमें कोई कल नहीं है
कोई भविष्य नहीं है
कोई आज नही
Hope you like the the hsin hsin ming hindi translation. Here you can read hindi book summary of As a man thinketh.